कैमूरडायरी
#कैमूरडायरी
(प्रस्तावना)
मेरे समूह में कुछ परम मित्र हैं, कुछ भाई हैं, कुछ दोस्त हैं, कुछ सहकर्मी हैं, लेकिन इनमें से मेरा एक भाई है और एक भतीजा है, दोनों भयंकर प्रकार के घुमक्कड़ प्रवृत्ति के हैं। मेरी कोई भी लंबी छुट्टी देखते हैं, तुरंत योजना बना डालते हैं। अगर उनकी छुट्टी और मेरी छुट्टी मेल खाती है और घर पर रह जाते हैं, तो हम सब अफसोस करते हैं कि काश कहीं घूम आए होते। एक दिवसीय यात्रा यहां हो सकती थी या द्विदिवसीय यात्रा यहां हो सकती थी। इन सबों के पास गाड़ी है और ५जी इंटरनेट है, तो जितनी देर में मैगी बनती है, उतनी देर में एक यात्रा की योजना कर देते हैं। सारी योजना इन्हीं की होती है, बस मुझे संयोजक बनाए रखते हैं। मेरा हाल राष्ट्रपति का होता है, जो बिना मंत्रिपरिषद की सलाह के कुछ कर ही नहीं सकता और मंत्रिपरिषद की सलाह को मानने से इनकार भी नहीं कर सकता।
पिछले साल की मिर्जापुर की पहाड़ियों की यात्रा, लखनिया दरी का जलप्रपात बड़ी मजेदार और रोमांचक रही थी। तभी से यह योजना बन रही थी कि कहीं और घूमने चला जाए। लगभग १ साल बाद कई बार योजना बनते-बिगड़ते एक योजना अंतिम हुई कि कैमूर की पहाड़ियां घूमी जाएं।
असल में मेरे समूह में जितने भी दोस्त, मित्र, यार, सगे संबंधी हैं, सब बहुमुखी प्रतिभा वाले हैं। इनको एक साथ किसी एक योजना पर तैयार करना मेंढकों को तोड़ने के बराबर होता है। एक को मिलाओ, दूसरा कूद जाता है; दूसरे को मिलाओ, तीसरा कूद लेता है; पहले को छुट्टी नहीं मिलती; दूसरे की तबीयत खराब होती है। एक के पास पैसे नहीं होते हैं, चौथे को उल्टी आती है, पांचवें को ठंडा लगता है, छठवें को गर्मी लगती है, सातवें को पापा नहीं मानतेहै।
कहां जाना है, यह तय करता है भतीजा मन भोलू। खाली बैठे नहीं कि तुरंत खोज करेगा कि १०० किलोमीटर की परिधि में घूमने वाली जगह, २०० किलोमीटर की परिधि में घूमने वाली जगह। उसके रील्स उसे जगह के ब्लॉग्स , you tube,देखता रहता है.. कितने घंटे लगेंगे, कितनी दूरी है,ट्रेनी सुविधा है या नहीं. और जब तक हम लोग चले नहीं जाते वहां, तब तक हम लोगों के व्हाट्सएप संदेशवाहक, इंस्टाग्राम के आने वाले संदेश, रील्स और छोटे वीडियो से भरते जाते हैं। यात्रा में कब-कब सबको भूख लगेगी, यह भोलू तय करते हैं और कैसे स्वयं ज्यादा खाकर अन्य सबको उसके नुकसान से बचाना है, यह भी ये तय करते हैं। इनका स्पष्ट मानना है कि यात्रा में कोई भी व्यक्ति ज्यादा चिप्स, कुरकुरे खाकर बीमार न पड़ जाए, इसलिए सबके हिस्से की वसा, वसा, अच्छा कोलेस्ट्रॉल, खराब कोलेस्ट्रॉल सोखने को सहर्ष तैयार रहते हैं।
कैसे जाना है, यह तय करता है अंशु। क्या क्या सावधानियां बरतनी हैं, कौन सा रेस्त्रां सही रहेगा, और सबसे बड़ा काम किस किस पोज में किस किस की फोटो अच्छी आएगी। हालांकि उसकी सब में आएगी और हम लोगों की एक दो में ही ।यह हमारे समूह का सबसे देखभाल करने वाला बच्चा है। मतलब यह कि किसको कहां बैठने से आराम मिलेगा, किसको ज्यादा हवा की जरूरत है, किसको सर्दी लग रही है, कब वातानुकूलक बंद करना है, कब खोलना है, इसको हाथ पकड़ के आगे ले चलना है। मतलब सबके सुविधा का ध्यान देता है, बालक और मेरे तो विशेष ही अपने, थोड़ी परेशानी सहकर भी सामने वाले को आरामदायक महसूस कराता है, सहज रहने देता है।
अगर योजना में सुहेल है, तो सड़क पर गड्ढा है तो किसको गाली देना है, जाम लगे तो किसको गाली देना है मतलब रास्ते में होने वाली किसी घटना का जवाबदेह कौन मंत्रालय होगा ये तय करना इनका काम है और किस जगह पर किस कोण से सीसीटीवी कैमरा लगा दिया जाए तो क्या-क्या दर्ज हो जाएगा, बस इतना वह तय करता है। और हां, किसी ज्वलंत मुद्दे, समसामयिक बात या कोई राजनीतिक शब्दावली पर मेरी वस्तुनिष्ठ राय जाननी हो तो मुझे उकसाता है।
अगर योजना में अविनाश हो, तो कहां-कहां पैसा बचाया जा सकता है, कितना घटिया सामान खाकर भी नहीं मरेंगे हम लोग, दुनिया में मनुष्य द्वारा किए गए कौन-कौन से खर्च फालतू हैं, कैसे इस योजना को रद्द करके पैसा बचाकर हम लोग अपने घर में नई-नई चीजें खरीद सकते हैं, यह यही तय करते हैं। भाई, सहपाठी,बाल सखा , मित्र और परिवारिक मामलों में प्रतिद्वंदी भी अनेक सम्बन्ध हैं, और मेरे दिल के बहुत करीब हैं , इनके फोन में इनसे अधिक मेरी फोटो है...काम के अलावा हम साथ साथ हैं वर्षों से इसलिए इनको अवॉयड नहीं किया जा सकता,थक हार के इन्हें ले ही जाते हैं, बशर्ते ये खुद कार्यक्रम में भाग लेने से भाग न लें यह बात अलग है कि उनकी राय का कोई मतलब नहीं निकलता है। चूंकि इनके साथ रहने से हास्य विनोद होता रहता है,
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