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मूंछें

मेरे पिता की ऊँची नाक थी इतनी ऊँची कि चाय के गिलास में डूब जाया करती थी जिन पर हँस पड़ती थी  घर की बच्चियाँ,  उनके पिता की भी नाक भी ऊँची थी ऐसा दादी बताती हैं, जिनके रौबदार मूंछो से बिना डरे घर की बच्चियाँ खेलती थी बचपन में बच्चियाँ बड़ी होती गईं  उनके साथ साथ बढ़ती गई उनकी मूंछे भी मूंछें बढ़ती गई जैसे बढ़ती है अमरबेल  बच्चियां बढ़ कर लड़कियां हो गईं  और मूंछें बढ़ कर इज्ज़त   मूंछें बरगद बनी जिसके नीचे पली किसी पीले पौधे के जैसे बच्चियाँ  अपने हिस्से का आकाश ढूंढ रहीं आज भी

the wait

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मैंने कभी एक फिल्म देखी थी,उसकी कहानी अच्छे से याद नहीं आ रही थी, उसमें एक प्रेग्नेंट लड़की और एक बूढ़ा आदमी थे। शायद वे एक बस स्टॉप पर मिले थे, बुजुर्ग व्यक्ति को लास्ट में लड़की लेकर बस से चली जाती है। बड़ा भावुक सा दृश्य था।बस  कहां ले गई उनको? आज मुझे याद आया कि कौन सी फिल्म थी,कब देखा था... उस लड़की की क्या कहानी थी ? क्यों दुखी थी। मन बेचैन हो गया। बहुत सोचा पर याद नहीं आया फिर मैने दिमाग पर जोर डाला कि उसका नाम याद आए तो उसे फिर देखूं फिर अंततः चैटजीपीटी की शरण में गया ... वहां भी बहुत देर यही प्लॉट डाल कर खोजा पर नहीं मिला... मुझे पता नहीं क्यों लग रहा था कि या तो ये काफ्का की कहानी है या कोई रशियन कहानी या फिल्म है। अलग अलग prompt देकर खोजा, इसी चक्कर में मेटामोर्फोसिस जैसी कालजयी कहानी फिर से पढ़ गया ,बहुत मुश्किल से इसने खोजा कि यह एक शॉर्ट फिल्म सह मानसिक रोग जैसे आटिज्म, डिमेंशिया जागरूकता अभियान से संबंधित थी। और नाम था The wait... फिर देखा इसे तल्लीनता से। पूरी कहानी कुछ इस प्रकार है कि एक गर्भवती महिला बस स्टॉप पर बैठी है। चेहरे पर चिंता साफ़ दिख रही है।...
प्रेम तुम्हे यदि सुन्दर और बेहतर मनुष्य नहीं बनाता है तो वह सबकुछ है पर प्रेम नहीं है,यह पंक्ति मैंने कहीं पढ़ी थी। मैं यह दावे के साथ कहता हूं कि तुम्हारे साथ मैं बेहतर मनुष्य हुआ। तुमने मुझे हृदय से चाहा सराहा और मेरी कटु वचनों, उलाहनाओं को सुना और सहा फिर भी मुझे हमेशा खुश रखने का प्रयास किया, मैंने इसकी परवाह शायद ही कभी की।  किसी को प्यार करना तुम्हें निर्मल और कारुणिक बनाता है पर किसी का प्यार पाना तुम्हें पवित्र और जिम्मेदार बनाता है। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैंने तुम्हारा प्यार पाया। मैं तुम्हें कितना प्रेम करता हूँ या नहीं करता हूँ ये तुम पर छोड़ता हूँ फिर भी इतना तो सच है कि मैं तुम्हारी परवाह करता हूँ ,जीवन के उन कठिन क्षणों के प्रति आगाह करता हूँ जो मैंने लड़कियों के जीवन में देखें हैं... मेरी तो यही आकांक्षा रहेगी कि ताउम्र ऐसे कठिन पल तुम्हारे जीवन में न आएं और मेरी आशंकाएं गलत साबित हों। स्वभाव से विद्रोही हूँ, समाज के इस बने बनाए ढांचे से मुझे अनेक शिकायतें रही हैं जो कभी कभी अनायास ही फूट पड़ती हैं जबकि तुम्हारा इसमें कोई दोष नहीं होता है। जानते हो जब हम किसी से नफर...
हंसते हंसते कहीं चुप हो जाता हूँ मैं... बात शुरू होती हाल चाल से, फिर बातें घर परिवार पर आती हैं। भइया ये कह रहे y, दीदी ये कह रही थे....पापा इस बात पर क्रोधित थे, मम्मी इस बात पर चिंतित थी। इन्हीं बातों के गुच्छों में, मेरी अपनी बातें आती हैं, मेरे अनुभव आते हैं जिनके वज़ह से कभी कभी कड़वाहट भरी आलोचनाएं भी सामने आती हैं। फ़िर दोनों " मैं "में उलझते हैं.... कि मैं ऐसा या मेरे घर ऐसा होता है। फिर उसमें से ही कोई बात चुभ जाती है किसीको।इसके बाद लड़ाईयां झगड़े हो जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है चुप्पियों का दौर... लम्बे लम्बे बिल्कुल paused calls.. जिसमें होता है हूँ, हाँ, और सब, ठीक है, बढ़िया... क्योंकि मेरी शब्द निरस्त हो जाते हैं जब मुझे अपनी भावनाएं व्यक्त करनी हों ,.. मुझे अपने दुःख खुशी प्रेम व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं होते,उनके पास ये कला है, उन्हें दुनिया की बातों से कोई मतलब नहीं.. उन्हें अपनी या अपने लोगों की बातों से मतलब होता है, जिसमें मैं भी हूँ। मेरा मूड किसी नेता अभिनेता या किसी अधिकारी के बेहूदा बयान पर दिन भर के लिए खराब हो सकता है,उनका मूड किसी फूल के खिल ...

पति की प्रेमिका

------------------- उस दिन पति के ऑफिस के गेट टूगेदर में मिली थी अनुपमा  मल कॉटन की गुलाबी साड़ी पहने खूब सुंदर लग रही थी मैं दूर बैठी देख रही थी अपने पति की प्रेमिका को । पहले एक बार मिले हैं हम  कांत ने ही मिलवाया था जब अचानक टकरा गयी थी अपने पति के साथ एक कैफे में  नेवी ब्लू मिडी ड्रेस पहने हुए तब कहाँ जानती थी मैं कि यह मेरे पति की प्रेमिका है फिर एक रोज़ कांत की वाट्सएप चैट पढ़ ली गलती से तब तो जान पाई कि  मेरा कांत दो सालों से किसी अनु का नील भी है।  तब मन तो बहुत किया कि घर में तूफान खड़ा कर दूं और इस अनु के घर भी जाकर तमाशा कर दूं  फिर जी चाहा कि कांत को छोड़ कर चली जाऊं  या उसे ही जाने को कह दूं घर से  ठंडे दिमाग से यह भी सोचा कि समझदारी से कांत से बात करूं ।  फिर जाने क्यों चुप रहना चुना कह देने से उससे प्रेम करना तो बंद करेगा नहीं अलबत्ता और सतर्क हो जाएगा या रिश्ता तोड़ भी ले तब भी मन से कैसे निकालेगा उसे?  और फिर कांत इतना ज्यादा कांत था मेरे साथ कि अगर गलती से पता नहीं चलता तो यह बात शायद मैं कभी न जान पाती कांत का मेरे प्रति ना ...

पत्नी का प्रेमी

---------------------- पांडे के भाई की शादी में मिल गया था नीलकांत  अकेला आया था , मैं भी अकेला ही था तो सोचा आज पम्मो के प्रेमी से गुफ्तगू कर ही ली जाए वह बेचारा नहीं जानता कि मुझे सब पता है  पम्मो को इतना ज्यादा जानता हूँ मैं कि उसके जीवन में आई छोटी से छोटी तब्दीली मुझसे छुपी नहीं रह सकती पम्मो का नील मेरे सामने बैठा था बढ़िया टक्सीडो पहनकर कितना सहज था मेरे सामने !  वेल स्पोकन , चार्मिंग , गज़ब का ह्यूमर  ऐसे लफ़ंडर तो किसी को भी अपने प्यार में फांस लें फिर पम्मो ठहरी सीधी सादी ,आ गयी होगी बातों में।  कॉलेज टाइम में काफी प्ले किये हैं मैंने आज अभिनय कला आजमाने का टाइम आया था  अपनी चिढ़ को सीने में दबाते हुए मैं उससे बड़े जोश से मिला  आज वह मौका हाथ आया था जिसकी मुझे कब से प्रतीक्षा थी अपने और पम्मो के बारे में इसे बताकर इसे राख कर देने की पम्मो पम्मो कर के मैंने इसके कान से खून निकाल दिया पम्मो इसके सामने कैसे सज संवर कर जाती है इसकी पसन्द के रंग पहनती है इसके हिसाब से सारे काम करती है घर में 8 बजे से पहले ना जागने वाली पम्मो  टूर पर जाते ही सुबह 6...

प्रेमिका का पति-------------------------

हम अचानक ही मिल गए थे किसी समारोह में  मैं जानता था कि वह मेरी प्रेमिका का पति है वह नहीं जानता था कि मैं उसकी पत्नी का प्रेमी हूँ  अलबत्ता यह जानता था कि मैं उसकी पत्नी का सहकर्मी हूँ बड़े जोश से वह मिला हमने एक टेबल पर बैठकर खाना खाया आज वह पत्नी के बिना आया था  लेकिन उसकी पत्नी उसकी बातों में इस कदर उपस्थित थी कि मुझे लगा नहीं कि वह नहीं आई है 'पम्मो ने एक दो बार आपका ज़िक्र किया था अच्छे दोस्त हैं ना आप दोनों'  मैं ' पम्मो ' सुनकर चौंका अनुपमा शाह यानी मेरी 'अनु' किसी की पम्मो भी है  दिल ने ज़ोर से धड़क कर मुझे इत्तिला किया कि उसे अच्छा नहीं लगा मैं पम्मो के बारे में वह सब सुन रहा था जो मेरी अनु में नहीं था मसलन अनु कितनी व्यवस्थित है और पम्मो कितनी लापरवाह अनु को संवर कर रहना कितना पसन्द  पम्मो इतनी बेखबर अपने आप से  कि इतवार को घर में बाल भी न बनाये  अनु को पसन्द है कॉफी और पम्मो चाय की दीवानी  अनु को गुलाबी रंग पसन्द है और पम्मो नीले पर फिदा पम्मो को उसका पति सुबह 8 बजे हिला-हिलाकर उठाता है अनु उसे खुद से पहले जागी हुई मिलती है  अनु म...