Posts

Showing posts with the label संवेदना

मरती संवेदना

Image
                 कविता यह मरती हुई संवेदनाओं का देश है जहाँ एक पैर दूसरे पैर को नहीं पहचानता जहाँ शहर हर रोज मेरा गाँव खाता जा रहा जहाँ महलों से आती रोशनी झोपड़ीयाँ जला रहीं जहाँ एक हाथ में फोन और दुसरे में तलवार है यह मरती हुई संवेदनाओं का देश है। यह डूबती हुई संभावनाओं का देश है जहाँ किसान ज़हर खाता है जहाँ छात्र लाठी खाते हैं जहाँ सेना पत्थर खाती है जहाँ भीड़ आदमी खाती है जहाँ सरकार घूस खाती है यह डूबती हुई संभावनाओं का देश है। यह आहत हुई भावनाओं का देश है जहाँ मिनारें आग उगलती हैं जहाँ घण्टों से चिंगारी निकलती है जहाँ भाषा दंगे कराती है किताबें घर जलाती हैं जहाँ झण्डों पर ख़ून के छींटे हैं। यह कुंठित-दमित वासनाओं का देश है जहाँ कलियाँ मसल दी जाती हैं चेहरे झुलसा दिये जाते हैं शरीर में पत्थर डाल दिये जाते हैं आँखो से एक्स रे लिए जाते हैं रिश्तों की आड़ में बच्चे नोंच लिए जाते हैं यह मरती हुई संवेदनाओं का देश है।