प्रेम तुम्हे यदि सुन्दर और बेहतर मनुष्य नहीं बनाता है तो वह सबकुछ है पर प्रेम नहीं है,यह पंक्ति मैंने कहीं पढ़ी थी। मैं यह दावे के साथ कहता हूं कि तुम्हारे साथ मैं बेहतर मनुष्य हुआ। तुमने मुझे हृदय से चाहा सराहा और मेरी कटु वचनों, उलाहनाओं को सुना और सहा फिर भी मुझे हमेशा खुश रखने का प्रयास किया, मैंने इसकी परवाह शायद ही कभी की। किसी को प्यार करना तुम्हें निर्मल और कारुणिक बनाता है पर किसी का प्यार पाना तुम्हें पवित्र और जिम्मेदार बनाता है। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मैंने तुम्हारा प्यार पाया। मैं तुम्हें कितना प्रेम करता हूँ या नहीं करता हूँ ये तुम पर छोड़ता हूँ फिर भी इतना तो सच है कि मैं तुम्हारी परवाह करता हूँ ,जीवन के उन कठिन क्षणों के प्रति आगाह करता हूँ जो मैंने लड़कियों के जीवन में देखें हैं... मेरी तो यही आकांक्षा रहेगी कि ताउम्र ऐसे कठिन पल तुम्हारे जीवन में न आएं और मेरी आशंकाएं गलत साबित हों। स्वभाव से विद्रोही हूँ, समाज के इस बने बनाए ढांचे से मुझे अनेक शिकायतें रही हैं जो कभी कभी अनायास ही फूट पड़ती हैं जबकि तुम्हारा इसमें कोई दोष नहीं होता है। जानते हो जब हम किसी से नफर...
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हंसते हंसते कहीं चुप हो जाता हूँ मैं... बात शुरू होती हाल चाल से, फिर बातें घर परिवार पर आती हैं। भइया ये कह रहे y, दीदी ये कह रही थे....पापा इस बात पर क्रोधित थे, मम्मी इस बात पर चिंतित थी। इन्हीं बातों के गुच्छों में, मेरी अपनी बातें आती हैं, मेरे अनुभव आते हैं जिनके वज़ह से कभी कभी कड़वाहट भरी आलोचनाएं भी सामने आती हैं। फ़िर दोनों " मैं "में उलझते हैं.... कि मैं ऐसा या मेरे घर ऐसा होता है। फिर उसमें से ही कोई बात चुभ जाती है किसीको।इसके बाद लड़ाईयां झगड़े हो जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है चुप्पियों का दौर... लम्बे लम्बे बिल्कुल paused calls.. जिसमें होता है हूँ, हाँ, और सब, ठीक है, बढ़िया... क्योंकि मेरी शब्द निरस्त हो जाते हैं जब मुझे अपनी भावनाएं व्यक्त करनी हों ,.. मुझे अपने दुःख खुशी प्रेम व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं होते,उनके पास ये कला है, उन्हें दुनिया की बातों से कोई मतलब नहीं.. उन्हें अपनी या अपने लोगों की बातों से मतलब होता है, जिसमें मैं भी हूँ। मेरा मूड किसी नेता अभिनेता या किसी अधिकारी के बेहूदा बयान पर दिन भर के लिए खराब हो सकता है,उनका मूड किसी फूल के खिल ...