हंसते हंसते कहीं चुप हो जाता हूँ मैं...
बात शुरू होती हाल चाल से, फिर बातें घर परिवार पर आती हैं। भइया ये कह रहे y, दीदी ये कह रही थे....पापा इस बात पर क्रोधित थे, मम्मी इस बात पर चिंतित थी। इन्हीं बातों के गुच्छों में, मेरी अपनी बातें आती हैं, मेरे अनुभव आते हैं जिनके वज़ह से कभी कभी कड़वाहट भरी आलोचनाएं भी सामने आती हैं। फ़िर दोनों " मैं "में उलझते हैं.... कि मैं ऐसा या मेरे घर ऐसा होता है। फिर उसमें से ही कोई बात चुभ जाती है किसीको।इसके बाद लड़ाईयां झगड़े हो जाते हैं।
इसके बाद शुरू होता है चुप्पियों का दौर... लम्बे लम्बे बिल्कुल paused calls.. जिसमें होता है हूँ, हाँ, और सब, ठीक है, बढ़िया...

क्योंकि मेरी शब्द निरस्त हो जाते हैं जब मुझे अपनी भावनाएं व्यक्त करनी हों ,.. मुझे अपने दुःख खुशी प्रेम व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं होते,उनके पास ये कला है, उन्हें दुनिया की बातों से कोई मतलब नहीं.. उन्हें अपनी या अपने लोगों की बातों से मतलब होता है, जिसमें मैं भी हूँ।

मेरा मूड किसी नेता अभिनेता या किसी अधिकारी के बेहूदा बयान पर दिन भर के लिए खराब हो सकता है,उनका मूड किसी फूल के खिल जाने मात्र से प्रसन्न।

सिलसिला टूट जाता है, फिर दोनों प्रयास करते हैं कोई नई बात लाने का..दोनों को दोनों की पसंदीदा मुद्दे पता हैं अंततः खोज ही लेते हैं किसी बात का सिरा... फिर जीवन जीने लगते हैं।कितना अच्छा है ये सफ़र जहाँ जीवन काटा नहीं जा रहा, कट रहा है।

बातों बातों में कई दफा शेर कविताएं कोट्स याद आते हैं,कभी गीत भी गुनगुना देता हूँ, बातचित में मेरे गीत या शेर को उनका सुनना , मुझे खुश कर देता है। इधर कुछ दिनों से इन्हीं बातों या गीतों की कोई पंक्ति मुझे रोक लेती है, मैं अटक जाता हूँ, बातें चलती रहती हैं पर बैकग्राउंड (नेपथ्य) में... पंक्तियों के शब्दों से होते हुए अक्षरों तक पहुंचता हूं...उन अक्षरों की के स्वरों की ध्वनियां मेरे कानों में गूंजने लगती हैं।
पता न किस पीड़ा का बोध होता है कुछ टूट जाता है बुरी तरह से... अवाक सा रह जाता हूँ अन्दर से,बाकी बातें चलती रहती हैं।
मेरे अन्दर के मैं की आह निकल जाती है..लेकिन होंठ हंसते रहते हैं। आँखें भविष्य की वो सब परछाइयां देखती हैं जो उन्हें शायद कभी देखने की इच्छा नहीं थी ...बातें चलती रहती हैं।
 
अब मेरे पास कोई सिद्धान्त नहीं है, जो थे वो मुझे मुँह चिढ़ाते से लगते हैं... कोई जादू सा कर दिया यार,सब कुछ बदल गया

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