"चंद कलियां निशात की चुनकर
मुद्दतों महवे यास रहता हूं
तेरा मिलना खुशी की बात सही
तुझ से मिलकर उदास रहता हूं...!"(-साहिर)

आज साहिर का जन्मदिन भी है ।बिलकुल यही मनोदशाहै मेरी,अब तुमसे विदा लेना तुमसे मिलने से बेहतर लगता है।NFK की एक लाइन है कि... आ फिर से मुझे छोड़ जाने के लिए आ। तुमसे मिल कर एक टीस सी उठती है, वो टीस फिर से तुम्हे विदा कहने का साहस दे जाती है। सोचता हूं बारहा सोचता हूं कि कभी तुम्हें मेरा देखना दिखाई दे।

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