#episode9 अब मैं लॉर्ड मेकाले का वह मैकाले का बदनाम भाषण लिखने जा रहा हूँ, जो विकृत रूप में सोशल मीडिया में घूमता रहा है। हम ब्रिटिश इतिहास को तोड़-मरोड़ कर यह कहने के योग्य नहीं रहते कि उन्होंने तोड़ा-मरोड़ा। इसलिए, इसका मूल पाठ करना चाहिए। मैं यहाँ मुख्य अंशों का सरल अनुवाद लिख रहा हूँ। उसके बाद इसमें आपत्तियों पर चर्चा होगी। यह ‘मिनट्स ऑफ एजुकेशन’ है जो कलकत्ता में शिक्षाविद थॉमस मेकाले ने प्रस्तुत किया। “मुझे बताया गया कि यहाँ की शिक्षा 1813 के ब्रिटिश अधिनियम के तहत निर्धारित की गयी है, जिसमें कोई भी बदलाव संवैधानिक माध्यम से ही संभव है। फ़िलहाल एक ख़ास रकम साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए मुहैया की गयी है। यहाँ साहित्य का अर्थ वे तमाम संस्कृत और अरबी ग्रंथ हैं। मैं पूछता हूँ, क्या यहाँ के लोगों को मिल्टन की कविताएँ और न्यूटन की भौतिकी नहीं पढ़नी चाहिए? क्या वे कुश-घास से देवताओं की पूजा करना ही सीखते रहेंगे? अगर हम मिस्र का उदाहरण लें, तो वहाँ भी कभी समृद्ध सभ्यता थी। अब वे कहाँ हैं? क्या उन्हें भी आदि काल के चित्रलेख (हीरोग्लिफिक्स) ...
Comments
Post a Comment