पत्नी का प्रेमी
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पांडे के भाई की शादी में मिल गया था नीलकांत
अकेला आया था , मैं भी अकेला ही था
तो सोचा आज पम्मो के प्रेमी से गुफ्तगू कर ही ली जाए
वह बेचारा नहीं जानता कि मुझे सब पता है
पम्मो को इतना ज्यादा जानता हूँ मैं
कि उसके जीवन में आई छोटी से छोटी तब्दीली मुझसे छुपी नहीं रह सकती
पम्मो का नील मेरे सामने बैठा था बढ़िया टक्सीडो पहनकर
कितना सहज था मेरे सामने !
वेल स्पोकन , चार्मिंग , गज़ब का ह्यूमर
ऐसे लफ़ंडर तो किसी को भी अपने प्यार में फांस लें
फिर पम्मो ठहरी सीधी सादी ,आ गयी होगी बातों में।
कॉलेज टाइम में काफी प्ले किये हैं मैंने
आज अभिनय कला आजमाने का टाइम आया था
अपनी चिढ़ को सीने में दबाते हुए मैं उससे बड़े जोश से मिला
आज वह मौका हाथ आया था जिसकी मुझे कब से प्रतीक्षा थी
अपने और पम्मो के बारे में इसे बताकर इसे राख कर देने की
पम्मो पम्मो कर के मैंने इसके कान से खून निकाल दिया
पम्मो इसके सामने कैसे सज संवर कर जाती है
इसकी पसन्द के रंग पहनती है
इसके हिसाब से सारे काम करती है
घर में 8 बजे से पहले ना जागने वाली पम्मो
टूर पर जाते ही सुबह 6 बजे अपने फोटो के साथ वाट्सएप स्टेटस अपडेट कर देती है
कैसे लापरवाह पम्मो इसके सामने टिपटॉप अनु बन जाती है
पम्मो सोचती है कि मैं कुछ नोटिस नहीं करता
जबकि पहले दिन ही जब उसने अपनी ऑफिस का पूरा वार्डरोब बदला
तभी मुझे खटका था
मैंने नीलकांत से पम्मो के असली रूप का ऐसा विस्तार से वर्णन किया
इतना प्यार उड़ेला अपने शब्दों में ,
कि साला नीलकांत जलन के साथ सोच में पड़ गया होगा
कि उसकी अनु और पम्मो एक ही हैं या अलग अलग ?
उसके चेहरे के बदलते रंग देख मुझे मज़ा आ रहा था।
सेडिस्टिक प्लेजर भी क्या कमाल की चीज़ है .....
पम्मो जब टूर निकालकर दूसरे शहर जाती है
तब मुझे पता होता है कि
कि नीलकांत महाशय भी ऑफिस से नदारद हैं ।
पम्मो को लगता होगा कि उसका पति गधा है
और वो इसलिए कि मैं लगने देता हूँ ।
मैं कब का पम्मो और इसका भांडा फोड़ चुका होता
अगर शादी के बाद भी मैं अपनी एक्स के साथ सम्बन्धों में नहीं होता
मैं अपनी कॉलेज टाइम की प्रेमिका के प्यार से कभी निकल ही नहीं पाया
या सच कहूँ तो निकलना चाहता ही नहीं था
पम्मो बेचारी उसके बारे कुछ नहीं जानती
इसलिए मैं भी नीलकांत के बारे में ना जानने का अभिनय कर रहा हूँ
इसलिए जब पम्मो मेरे पास एक टर्म लेकर आई ' स्लीप डिवोर्स'
और पचास वजहें गिनाते हुए अलग अलग कमरों में सोने का प्रस्ताव रखा
मैं मन ही मन हँसा था उसके भोली शातिरता पर
और मन ही मन खुश भी हुआ कि अब मैं अपनी प्रेमिका से देर रात चैट कर सकूंगा
और पम्मो से मुझे प्यार है या उसकी आदत
इस सवाल का ठीक ठीक उत्तर खुद को नहीं दे पाता
मगर वह मुझे अच्छी लगती है और
मुझे वह चाहिए अपनी ज़िंदगी में
अपनी पत्नी और अपनी बेटी की माँ के रूप में
जब कोई एक चोरी करता है तब होता है धमाका
और टूट जाते हैं घर
अब दोनों चोर हैं और दोनों चुप हैं
ऐसे ही चल रही हैं शादियां और ऐसे ही बच भी रही हैं।
कभी कभी सोचता हूँ
कि हर वक्त अभिनय करते हुए हम खुद भी भूल जाते हैं
कि हम असल कब और कहाँ होते हैं
कितने मंजे हुए कलाकार हो जाते हैं हम दो रिश्तों को साधते हुए
फिर सिगरेट का एक कश लेकर इस ख़याल को हवा में उड़ाता हूँ और सोचता हूँ कि
कि हम एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर करने वालों से
बॉलीवुड को ट्रेनिंग लेनी चाहिए।
हा हा हा.....
-------पल्लवी त्रिवेदी
[ ' प्रेमी प्रेमिका और उनके वो ' सीरीज़ की चौथी कविता ]
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