स्पर्श के हस्ताक्षर
उफ़!कितनी उदास शाम है।अल्हड़ पुरवाई भी बहका नहीं रही है।कोयल की बोली की मिठास भी हृदयान्तर के कड़वाहट को धो नहीं पा रही।रफी के संजीदा गाने में रूहानियत ही ना रही।गुलाम अली अब बेसुरा गाता है,वो लरजिस ही ना रही... न ही किशोर के चुलबुले नटखट गानों के झोंके।
कितना कुछ बदल सा गया है।तुम्हारे बगैर जीवन नीरस हो चला है।दूरियों का भौतिक अस्तित्व अब डराता है।पूरी दुनिया जम सी गई है।सुबह होता है और बमुश्किल रात होती है।शाम हुए जमाना हो गया।मैंने कभी तुम्हे छुआ नहीं है पर अंगुलियों में तुम्हारे देह के स्पर्श क्यों याद आ रहे?मैं नहीं जानता.तुम्हारा न होना उतना ही झूठा है जितना कि तुम्हारा होना।तुम मुझसे कभी मिली नहीं परन्तु मेरे होठों पर तुम्हारे अहर्निश चुम्बनों के निशान तुम्हारे होने की दुहाई दे रहे।बालों में तुम्हारी हथेलियों के नर्म निशान उलझे हुए हैं।
तुम्हारी पथरायी आँखों में अब भी मैं एक इंतिजार की राह दखता हूँ जिस पर मेरी स्पर्श के स्पष्ट हस्ताक्षर हैं।
क्या कहूँ ?मेरे कहने और सोचने में कोई साम्य नहीं है।तुम्हे याद है!मैंने कहा था कि शब्द कभी भाव के पर्याय नहीं हो सकते हैं।इनकी क्षमता से बाहर है मेरी भावनाओं को व्यक्त करना।बहुत कुछ है जो मैं तुमसे कहना चाहता हूँ।मैं अपनी सारी स्मृतियों को तुम्हारे सामने उकेर देना चाहता हूँ जैसे कागज और पेसिंल पर तुमन शब्दों की परछाइयां उतारी हैं।अपने स्वप्न के चलचित्रों में तुम्हारे मूक और चंचल आँखों को रोप देना चाहता हूँ।तुम्हारे आभासी अस्तित्व के साथ व्यतीत किये हुए प्रत्येक पल अब भी मेरी स्मृति-पटल पर उपस्थित हैं
हृदय उमड़ रहा है।बार बार उमड़ रहा है।जी करता है कि तुम्हारे हृदय स्पंदनो को भींच लूँ अपने बाहुपाश में,उम्र भर के लिए और तुम्हारी देह की अलभ्य उष्णता श्वासों में भर लूँ।केदारनाथ सिंह ने कहा है कि जाना हिन्दी की सबसे खौफनाक क्रिया है और मैं कहता हूँ गले लगाना सबसे प्रेमिल क्रिया है।
समय ने मेरी प्रत्येक खुशी को मुझसे मिलने से पहले ही अलग कर दिया है ।
पिछले कुछ सालों में हमने कितने मीलों की अनवरत यात्रायें की है!जीवन कितने मार्गों को स्पर्श किया है!हमारा मिलना संयोग था और न मिलना एक गहरा षणयंत्र।समय ने हमेशा छला है मुझे।लेकिन इस बार कैसे सफल होगा ये? तुम्हारे आभासी अस्तित्व को कैसे दूर करेगा मुझसे!
क्या तुम्हे याद है कि मैंने एक बार दावा किया थी कि तुम मुझे मुझसे अधिक जानती हो।क्या तुम मेरे ईस दावे को अक्षुण्ण रखने में मेरी सहायता करोगी?
हमारे तुम्हारे बीच की अपरिमित दूरी हमारी प्रतिबद्धताओं को रोक नहीं सकती,तुमने पढ़ा होगा कि दो बिन्दुओं के बीच की न्यूनतम दूरी एक सरल रेखा होती है।गलत पढ़ा है ये!मैं इन दोनों बिन्दुओं के बीच की के अवकाश को मोड़ कर दोनों बिन्दुओं को अध्यारोपित करने का साहस रखता हूँ।
क्या अब भी तुम्हारे स्मृतियों में हूँ?क्या तुम अब भी मुझे याद करती हो?क्या तुग मुझे सुन रही हो?
तुम और संसार की सबसे अभागी स्त्री हो क्योंकि तुम्हें मैं मिला,और मैं परम भाग्यशाली हूँ कि मुझे तुम मिली।
मैं उस समय की प्रतीक्षा करूँगा जब शून्य शून्य पर अध्यारोपित होगा।
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