हमारे हमारी मित्रता सूची में बहुत से लोग ऐसे हैं जो दिन रात फेक न्यूज़ अर्थात भ्रामक या अर्ध सत्य खबरें शेयर करते रहते हैं इन लोगों को अभी भी भरोसा है की टीवी पर न्यूज़ चैनल देख कर सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं समय-समय पर ऐसे लोगों को समझाने का प्रयास करता हूं तथा फेसबुक पर द्वारा दिए गए अनफॉलो अमित्र तथा 30 दिन के लिए इनके पोस्टों को अदृश्य करने के विकल्प का प्रयोग करता हूं कोना के संबंध में फेसबुक टि्वटर व्हाट्सएप तथा खासकर यूट्यूब पर अनेक फर्जी तथा भ्रामक सूचनाएं फैली हुई है इसको रोना काल में तमाम लोगों की नौकरियां चली गई तमाम लोगों की बहुत से लोग अपनी जान से हाथ धो दिए बहुत से लोग भुखमरी की कगार पर है सरकारों को भयंकर आर्थिक घाटा हुआ है परंतु कुछ लोग ऐसे हैं जिन को फायदा ही फायदा हुआ है जैसे यूट्यूब पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बेवकूफ पत्रकार तथा एंकर पुलिस स्टाफ। यह सभी लोग अप पोस्ट जानकारियां फैलाकर सनसनी फैलाकर भ्रामक हेडिंग या शीर्षक बनाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं जिससे कि इनकी टीआरपी बढ़ सके इनकी भी वर्ष बढ़ सकें इनके लाइक और कमेंट पढ़ सकें मैंने तो इन न्यूज़ चैनल को देखना ही बंद कर दिया है इन न्यूज़ चैनलों पर हिंसा हिंसात्मक भाषण इन करो वह पत्रकारों का चीखना चिल्लाना तथा भिन्न-भिन्न वर्गों के तथाकथित प्रतिनिधियों को बुलाकर भिंड भिंड मुद्दों पर बहस कराना इनका प्रिय शगल बन चुका है
मासिक परीक्षा
पिछले वर्ष, शिक्षा विभाग ने मासिक परीक्षाओं की एक महत्वाकांक्षी योजना लागू की थी, जिसका उद्देश्य छात्रों की शैक्षिक प्रगति को नियमित रूप से आँकना था। इसके तहत प्रत्येक कक्षा और विषय के लिए बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर प्रश्न पत्र तैयार किए जाते थे। इन प्रश्न पत्रों को जिला स्तर से सभी स्कूलों तक पहुँचाने की व्यवस्था थी, लेकिन यह प्रक्रिया कई चुनौतियों और अव्यवस्थाओं से भरी थी, जिसने शिक्षकों, छात्रों, और स्कूलों के लिए कई कठिनाइयाँ पैदा कीं।प्रश्न पत्रों को जिला मुख्यालय से स्कूलों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाल दी गई थी। ये पेपर जिला स्तर से भेजे नहीं जाते थे; इसके बजाय, शिक्षकों को स्वयं जिला कार्यालय जाकर इन्हें लेना पड़ता था। यह कार्य अत्यंत श्रमसाध्य और समय लेने वाला था। शिक्षकों के सामने यह सवाल रहता था कि कौन जाए और कौन पेपर लाए। कई बार प्रधानाध्यापक स्वयं इस जिम्मेदारी को निभाते, तो कभी अन्य शिक्षकों को भेजा जाता। इस प्रक्रिया में शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। जिला कार्यालय में प्रश्न पत्रों के पैकेट अव्यवस्थित ढंग से रखे जाते थे। स्कूल-विशिष्ट पैकेट ढू...
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