गाय और स्त्री
मेरे बाबा ने गाय पाला
ऐसा मेरी दादी बताती है
जिसके लिए तरह तरह के चारे बोए
नर्म राख से घारी बनायीं
दादी भी दोनों समय हाथ फेरती पीठ पर
आपने हाथों से खिलाते चारा और घास
बाबा कहते लक्ष्मी है लक्ष्मी!
गाय समय से
उकड़ा दी जाती नाद से खूंटे पर
खूंटे से बंधी गाय खड़ी रहती बिना हिले डुले
बाबा के इशारे से प्रतीक्षा में
स्त्रियाँ गाय थीं
जो समय से खूंटे से बांध दी गईं।
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