रंगरेज

सुना है बड़े रंगरेज़ हो तुम
कुछ मुट्ठी भर उदासी तुम्हारी 
चौकठ पर रख आये हैं
भर दो ना रंग इनमें।

चढ़ा दो ना रंग 
अपने होठों की सुर्खियों का
सफ़ेद !झक सफ़ेद पड़े चेहरे पर।

आओ! आओ ना 
चुपके चुपके दबे पाँव
भर लो अंक में मेरे शब्दों को
मै शब्दों में ही जीता हूँ तुम्हें।

 छाता जा रहा है ना!
उन काली स्याह आंखो का रंग
छीने हुए सतरंगी जीवन में।

मैं मिलूँगा वही 
जहाँ मैं नहीं तुम नहीं
रंग नहीं प्यार नहीं
सिर्फ हम होंगे।
-------------------#यायावर

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