मेम्स कल्चर
मुझे अपने मित्रों से आज मुझे बेहद नाराजगी है क्योंकि ये आलोचना और विरोध में अंतर नहीं समझ पा रहे।आलोचना लोकतंत्र के मूल में है।कुछ लोग विरोध व समर्थन की चरम सीमा पर पहुँच गए हैं।सरकारें को प्रतिपुष्टि देना जनता का अधिकार व कर्तव्य है।
सबसे बुरी बात ये है कि प्रत्येक राजनीतिक दलों की आई टी सेल तथा विभिन्न राजनेताओं,अभिनेताओं व अन्य सेलिब्रिटीज फैन क्लब अपने समर्थकों तथा फालोवरों को बरगलाने का कार्य कर रहे।बिना तथ्यों की जांच-पड़ताल किये पढ़े-लिखे लोग भी इन फैन क्लबों तथा आई टी सेल द्वारा प्रायोजित लाल-हरे-पीले इत्यादि रंगो द्वारा सजाये गये न्यूज़ तथा न्यूज़ मीम्स शेयर कर रहे हैं। कुछ लोग राजनीतिक वन लाइनर लिखकर #हैशटैग ट्रेंड करा रहे हैं। एक प्रसिद्ध वाक्यांश चल पड़ा है की "तब कहां थे जब..." यह अपने आप में ही अर्ध सत्य है।क्योंकि देशकाल परिस्थितियों के साथ तस्वीरें अपना मूल संदर्भ खो भी देती हैं।हर व्यक्ति हरसमय हर जगह नहीं हो सकता।ये भी सम्भव है कि फलां घटना घटित हो रही हो तो वह नहीं उपस्थित रहा हो अथवा कल अमुक घटना के समय रहा हो आज नहीं हो। आज की कोरोना संक्रमण के समय भी लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं।सभी राजनीतिक दल अपना राजनीतिक एजेंडा तथा नैरेसन सेट करने में लगे हैं। कुछ लोग नासमझी तथा कुछ लोग विभिन्न राजनीतिक दलों/पंथो/मजहबों में आस्था एवं विश्वास रखने के कारण जानबूझकर भ्रामक/झूठ /अर्ध सत्य अथवा तोड़ मरोड़ कर पेश किए गए तथ्यों को शेयर कर रहे हैं। सोशल मीडिया मइले,क्ट्रॉनिक मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में बहुत सी गलत एवं भ्रामक जानकारियां आ रही हैं।हमें फौरन #नकलचेप(copy and paste) करने से बचना चाहिए। हमें अपने सामने आने वाली हर खबरों को संदेह की दृष्टि से देखना चाहिए। कोरोना वायरस की इस वैश्विक संक्रमण के दौर में आम जनमानस अपने चहेते राजनेताओं समाजसेवियों सेलिब्रिटी क्रिकेटर्स इत्यादि से सहानुभूति व मदद की अपेक्षा रखता है परंतु विभिन्न राजनीतिक दलों के आईटी सेल और उनके अंधसमर्थकों /अंधविरोधीयों द्वारा इस अपेक्षा का नाजायज फायदा उठाया जा रहा है।इंटरनेट वह मीडिया की इस बहुत बड़ी भीड़ में सही और सटीक सूचना प्राप्त करना अत्यंत कठिन कार्य है । बहुत मुमकिन है कि इन सभी राजनेताओं,सेलिब्रिटी,क्रिकेटर इत्यादि द्वारा गरीबों को बेसहारों की की जा रही सहायता की जानकारी हम तक ना पहुंचे या पहुंचे भी तो गलत ढंग से तोड़ मरोड़ कर पहुंचे।बहुत से लोग गुप्त दान में विश्वास रखते हैं। कुछ लोग जाने अनजाने में धर्म,जाति,वर्ग,दल विशेष के आधार पर टिप्पणियां कर रहें कि फलां ने इतना दान/सहयोग दिया..उसने क्यों नहीं दिया या इतना ही सहयोग क्यों किया इत्यादि जो कि कतई उचित नहीं है। कृपया अपने सामने आने वाली खबरों की अपने स्तर से जांच कर लें तत्पश्चात सूचनाओं को अग्रेषित करें।
लाल-पीले-हरे-नीले रंग से तैयार मीम्म मुझसे कतई साझा ना करें।मौलिक अभिव्यक्तियों का सदैव स्वागत है।
पूरा पढ़ने के लिए धन्यवाद।
✍अतुल पाण्डेय
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