जिम्मेदारी

जिम्मेदारी

जिम्मेदारियों के बोझ से
सयाना हुआ डेढ़ बित्ते का कंधा
आँखे चुराता है
गाँव के पोखरी में इठलाती कुमुदनी से
कंचे खेलते बच्चों के झुण्ड से
सामने हाथ फैलाये बचपन की
कल्पनातीत परछाई से,
खड़ी कर रखी हैं तर्को की दीवारें
अपने इर्द गिर्द 
कहीं आक्रांत ना कर दे बचपना उसे..

-अतुल पाण्डेय

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