मानव 8
#letter8 #schoolhistory
पूरी दुनिया में दो तरह के लोग रहते हैं। एक, जो हज़ारों वर्षों से चल रही परंपरा से जीना चाहते हैं, जिन्हें परंपरावादी (कंज़रवेटिव) कहते हैं। दूसरे, जो परंपराओं को तोड़ कर नयी गढ़ना चाहते हैं, जिन्हें प्रगतिवादी (प्रोग्रेसिव) कहते हैं। दोनों मिल कर कुछ अच्छा कर जाते हैं।
मनुष्य मुख्यत: मांस पका कर या मछली मार कर खाते थे। बारह हज़ार वर्ष पूर्व कुछ आदमी फरात नदी के किनारे से गुजर रहे थे। वहाँ उन्होंने देखा कि लंबे घास हैं, जिनमें कुछ बालियाँ निकली है।
वे पहले फल-सब्जी खाते रहे थे, मगर यूँ घास नहीं चबाते थे। अगर आज के भोजन का मेन्यू देखा जाए, तो उसमें से अधिकतर चीजें गायब होंगी। न चावल, न ब्रेड, न दाल, न मक्खन। फिर भी उनका पोषण संतुलित था। चलते रहने की वजह से उन्हें कभी एक फल मिल जाता, तो कभी एक जंगली हरी सब्जी। कभी कंद उखाड़ लिया और कभी ताज़ा मांस खाया। हर दिन कुछ नया खाना, हर मौसम में अलग खाना। यह नहीं कि रोज चावल-दाल ही खा रहे हैं। इसमें सरप्राइज़ रहता कि वह आखिर क्या खायेंगे, और सबसे अच्छी बात कि भोजन वह मेहनत से हासिल करते। जब भूख लगती, तभी खाते।
जब उन्होंने नदी किनारे वह घास चबा कर देखी, तो उन्हें कुछ दाने मिले। उन्होंने उसे पकाना शुरू कर दिया। आज के समय वे गेंहू या जौ कहलाते हैं, मगर उस समय वे घास ही थे जो नदी किनारे के मैदानों में मिल जाते। वे मनुष्य के आने से पहले मौजूद थे, और डायनासोर भी खाते थे। (क्या आपको पता है कि भयावह दिखने वाले अधिकांश डायनासोर शाकाहारी थे?)
वह इलाका जो दजला (टिगरिस) और फरात (यूफ्रेटस) नदी के बीच था, उस तरह की जमीन भारत में ‘दोआब’ कहलाती है। आब का मतलब है जल। दोआब- जिसके दोनों तरफ पानी हो। ग्रीक ने इस तरह के इलाके को नाम दिया मेसोपोटामिया। पोटामिया का अर्थ होता है दरिया। जैसे हिप्पो का अर्थ है घोड़ा, हिप्पोपोटामस का अर्थ दरियाई घोड़ा; उसी तरह मेसो का अर्थ मध्य, मेसोपोटामिया का अर्थ दरियाओं के मध्य।
इसी तरह की उपजाऊ जमीन भारत के राजस्थान-सिंध में थी, जहाँ सिंधु से लेकर सरस्वती नदी तक बहती थी और हज़ारों झील थे। आज आपको ताज्जुब होगा मगर यह रेतीला राजस्थान ही कभी भारत के फलों, सब्जियों और अनाज का प्राकृतिक केंद्र था।
प्रगतिवादी किस्म के आदमी ने कहा, “देखो! यहाँ नदियाँ हैं, झील हैं, तरह-तरह के जानवर पानी पीने आते हैं। हम अगर यहीं बस जाएँ, तो क्या बुरा है?”
उसे एक परंपरावादी ने कहा, “अगर नदी में बाढ़ आ गयी तो? अगर सूखा पड़ गया तो? अगर जानवरों ने यहाँ आना छोड़ दिया तो? हम रुकेंगे, मगर बसेंगे नहीं।”
“कुछ समय यहाँ जमने में क्या बुरा है? यहाँ गुफा तो है नहीं। हमें कुछ ऐसी जगह बनानी होगी कि बारिश हो तो छुप सकें।”
“हाँ। यह कर सकते है। हम गर्मियों और बरसात में आकर इन स्वादिष्ट घासों को पका कर खायेंगे, और इन लंबी घासों के बीच छुप कर शिकार करेंगे। ठंड में हम यहाँ से कहीं और निकल लेंगे।”
(To be continued)
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Earliest signs of agriculture in stone age India is found in Belan valley, around 7-10000 BC. Where are sites of Belan valley roughly located?
A. Prayagraj (Uttar Prasesh)
B. Bhopal (Madhya Pradesh)
C. Bikaner (Rajasthan)
D. Kokrajhar (Orissa)
(Yesterday’s answer: B. To eat in ‘metal’ plates was not possible in early stone age.)
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