सतुआन
आज १४ अप्रैल की तिथि अति महत्वपूर्ण तिथि है।एक तो आज अम्बेडकर जी की जयंती है,दूसरे की भोजपुरिया समाज का प्रमुख लोकपर्व कर्क संक्रांति अर्थात् सतुआन है।यह हम गवँई खेतिहर लोगों का सादा और प्रकृति के अनुकूल त्यौहार है।रबी की फसल पक के तैयार है।चहूँ ओर खेतों में धूसर सफेदी फैली हुई है।गेहूँ की प्रौढ़ बालियाँ अपने धवल शीर्ष झुकाई हुई हैं।बसंत और ग्रीष्म ऋतु का संधिकाल है।रबी की अगेती फसलें जैसे चना,मटर,जौ इत्यादि किसानों ने पहले ही काट-बांध-ढो-पीट-ओसा- फटकर सुरक्षित कर लिया है।
कहीं ट्रैक्टर और कम्बाईन हार्वेस्टर की तो कहीं खेतों में हसुंआ से गेहूँ के डण्ठल काटने की चिर-परिचित तीक्ष्ण पर आनंददायक ध्वनि सुनाई पड़ रही है।
सूरज की तल्खी के कारण पछुआ हवा की शीतलता बस अब जाने को है।पछुआ हवाओं और बालियों के मिलन से सुमधुर खन-खन की ध्वनि किसानों के हृदय को आनंदित कर रही है।आम की डालियों पर बैठे हुए पक्षी-युगल आम के नव-विकसित फलों को निहार कर विभोर हुए जा रहे।महुआ के मादक पुष्प की सुगंध से बौरायी कोयल कूके जा रही।लाक-डाउन के कारण नटखट बच्चे घरों में से ही कोयल को चिढा रहे हैं। कोयल भी कहाँ कम है,वह अब सप्तमसुर से कूऊऊ कूऊऊ किये जा रही।बागीचे के कोने में खड़ा विल्व वृद्ध वृक्ष अपने पके फलों की सुगंध से पूरे बागीचे को गुञ्जायमान किये हुए है।
आज सतुआन के दिन चूल्हे को विश्राम दिया जाता है। जौ,चना,मटर,मक्का के सतुए के साथ आम के टिकोरों और अजवायन की चटनी,पुदीना-धनिया और इमली की चटनी,प्याज-टमाटर-खीरे का सलाद का संयोजन परम स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्धक होता है।पुनः आप सभी को #लोकपर्व_सतुआन तथा अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं तथा स्वतंत्र भारत के संविधान के महत्वपूर्ण शिल्पी,प्रधम विधि मंत्री,प्रख्यात मानवता, न्याय और समानता के अप्रतिम योद्धा,कमजोरों-असहायों की चेतना के अग्रदूत , अमानवीय वर्ण एवं जाति व्यवस्था के प्रचंड विरोधी, प्रखर मानवतावादी चिंतक भारत रत्न डॉ भीमराव अंबेडकर को श्रद्धा के पुष्प अर्पित करता हूँ।
✍अतुल पाण्डेय
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