riya

मीडिया छी...छी सत्ता
केवल रिया...रिया...रिया...रिया!
ये स्तर हो गया इस देश का?ये हाल हो गया इस मीडिया का?
तनिक भी लज्जा नहीं आती हुक्मरानों और इन मीडिया हाउस वालों को?एक सुनियोजित साजिश के तहत एक आरोपी महिला का चरित्र हनन किया जा रहा।ये है मीडिया ट्रायल क्या होता है?
इससे घृणास्पद बात क्या हो सकती है कि किसी मासूम की हत्या को चुनाव जीतने का साधन बना लिया जाय?बिहार चुनाव में सुशान्त के पोस्टर लग रहे हैं।क्या देश में न्यायपालिका मर खप गयी या न्याय तंत्र किसी काम नही रहा।सुशान्त का केस की सीबीआई जाँच चल रही लेकिन बेलगाम बेशर्म मीडिया समानांतर न्याय तंत्र विकसित कर आरोपी को दोषी सिद्ध करने में लगा है।  
ये भीड़ किसी दिन हमारे-आपके बहन बेटी का चरित्र हनन कर बैठेगी।
The cold blooded media doesn't has any interest to talk about farmers,students issues.
The sycophantic media is glorifying the government. It does not ask questions of power. It only puts the public in the dock. For this, the woman is an object. The ideology of a organization was imposed on the audience.
These are the main issues at the behest of power such as unemployment, inflation, recession.

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